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लिंगानुपात में उत्तराखंड पीछे, अफसरों ने नाकामी छिपाने के लिए ढूंढा नया बहाना

Wed, 22 Nov 2017 11:04 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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लिंगानुपात के मामले में राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे चल रहे उत्तराखंड के अफसरों ने अब इस नाकामी से बचने का नया बहाना ढूंढ निकाला है।
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स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है राज्य की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जिलों में गर्भ की जांच का अवैध कारोबार चल रहा है, जिससे राज्य में लिंगानुपात गड़बड़ा रहा है। ऐसे में अब शासन यूपी के अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई करने का अनुरोध करने जा रहा है।

उत्तराखंड में शून्य से छह साल के बालक-बालिकाओं के बीच लिंगानुपात चिंताजनक है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में प्रति हजार लड़कों पर 890 बेटियां हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 919 का है।
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इसमें भी सीमांत जिले पिथौरागढ़ की स्थिति देखें तो वह और भी सोचनीय है। यहां पर प्रति हजार पर 816 बेटियां है। इस मामले में यूपी भी उत्तराखंड से आगे हैं।

यूपी में यह प्रति हजार पर औसत 902 का है। इस लिंगानुपात का मामला बीते दिनों नीति आयोग के उपाध्यक्ष के सामने भी आया था और उन्होंने इस पर चिंता भी जताई थी।
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दस सालों में घटी बालिकाओं में संख्या

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में प्रदेश में गर्भ में लिंग की जांच को लेकर खासी सख्ती है, लगातार टीमें कार्रवाई कर रही हैं।

विभाग के अफसर संदेह जता रहे हैं कि बेटों की चाह में लोग उत्तराखंड से सटे यूपी के जिलों में अवैध रूप से चल रहे जांच केंद्रों में जांच करा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग यूपी को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई का अनुरोध करेगा।

2001 में उत्तराखंड में प्रतिहजार पर 908 बालिकाएं थी। जो दस सालों में घटकर 890 पर पहुंच गई। इसी तरह पिथौरागढ़ जिले में प्रतिहजार पर 902 बालिकाएं थी, जो 2011 में घटकर 816 पर पहुंच गई।

यूपी से सटे जिलों में चल रहे अवैध जांच केंद्रों में गर्भ में लिंग की जांच होने का संदेह है, इसके कारण उत्तराखंड में लिंगानुपात गड़बड़ा रहा है। इस मामले में यूपी के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को जांच और अवैध सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा।
-नितेष झा, सचिव स्वास्थ्य
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