वन्यजीव अंग बरामदगी के मामले में कुख्यात शिकारी को सजा सुनाए के बाद उत्तराखंड ने ली राहत की सांस ली। जानिए पूरा मामला..
कुख्यात शिकारी भीमा बावरिया को फरीदाबाद में वन्यजीव अंग बरामदगी के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद उत्तराखंड ने भी राहत की सांस ली है। भीमा पर उत्तराखंड में कर्णप्रयाग से लेकर कोटद्वार तक मुकदमे दर्ज हैं।
कार्बेट पार्क की दक्षिण सीमा से भीमा गैंग चलाता है। भीमा 2002 में कर्णप्रयाग में पुलिस के हत्थे चढ़ा था, उस वक्त भीमा के पास वन्यजीवों के शिकार में इस्तेमाल होने वाला फंदा, कड़का आदि औजार बरामद हुए थे।
इसके बाद भी भीमा के कार्बेट पार्क के आसपास क्षेत्र में सक्रिय होने की खबर आती रही। 2005 में बिजनौर क्षेत्र में वह बाघ की खाल के साथ पकड़ा गया था। 2014 में भीमा कोटद्वार क्षेत्र के सनेह में वन्यजीव अंग के साथ पकड़ा गया।