चंडीगढ़ से उन्हें सोमवार रात बस से चंडीगढ़ से देहरादून लाया गया। मंगलवार सुबह मेडिकल जांच कर बस में बैठाया गया।
जब बस रुद्रप्रयाग से आगे जाने लगी तो उन्होंने चालक-परिचालक से कहा कि उन्हें रुद्रप्रयाग उतरना है। उन्होंने कहा कि हां वहीं उतारा जाएगा। लेकिन, जब अंतिम स्टॉप पर बस रुकी तो पता चला कि वह गैरसैंण पहुंच गए। उन्होंने जब चालक-परिचालक से आपति जताई तो उन्होंने गलत व्यवहार किया।
कहा कि इस संबंध में चमोली व रुद्रप्रयाग प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से भी फोन पर मदद मांगी, लेकिन उन्होंने हामी भर कोई कार्यवाही नहीं की। आरोप लगाया कि व्यवस्था की खामी का खामियाजा निर्दोष आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कहा कि उनके भाई को गैरसैंण विधानसभा भवन में रखा है।
गोविंद राम ने कहा कि वह पहले ही परेशान थे, अब प्रशासन की खामी की बेवजह की सजा भुगतकर टूट गए हैं। उन्होने सोचा था कि गांव में परिवार के बीच पहुंचकर दुख साझा करेंगे, लेकिन अब वह घर जाने की आस में ठगा सा महसूस कर रहे हैं।