उत्तराखंड सरकार और संगठन से जुड़े नेता एक साथ राहुल गांधी से मिले। इस मुलाकात में बड़े नेताओं ने लगभग चुप्पी और खुद को औपचारिक बातचीत तक ही सीमित रखा।
वहीं दूसरी पंक्ति के नेता जब राहुल से मिले तो अपने शिकवे-गिले भी गिनाए। दिल्ली अधिवेशन में राहुल गांधी के साथ उत्तराखंड के नेताओं ने करीब चालीस मिनट बिताए। उत्तराखंड के नेताओं की ओर एक ज्ञापन भी राहुल गांधी को सौंपा गया है।
राहुल से की शिकायत
राहुल के साथ मुलाकात में दूसरी पंक्ति के नेताओं ने यह तो कहा कि मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में राज्य आपदा के बाद एक बार फिर सामान्य हालातों में विकास कर रहा है। लेकिन नेताओं ने शासन में सहभागिता की मांग और मंत्रियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया।
प्रदेश के एक पदाधिकारी ने तो यहां तक कह दिया मंत्री काम तो दूर अपने कार्यालयों में बैठने तक को नहीं कहते हैं। बातचीत में सत्ता में भागीदारी न होने से पार्टीजनों में निराशा व आक्रोश की बात भी कही गई। एक अन्य पदाधिकारी ने कार्यकर्ताओं के मान सम्मान और अनुशासनहीनता का मुद्दा उठाया।
संगठन की उपेक्षा का आरोप
बहुगुणा समर्थक कहे जाने वाले दो विधायक और कुमाऊं के एक जिलाध्यक्ष ने राहुल से बातचीत में मुख्यमंत्री की कार्य कुशलता की तारीफ की। वहीं सरकार की ओर से खाली पड़े दर्जाधारी पदों को अभी तक न भरे जाने पर कुछ नेताओं ने नाराजगी जाहिर की।
एक नेता यह भी कहा कि पार्टी में कुछ काबिल लोग उपेक्षित हो जाते हैं ऐसे में जरूरी है कि उनकी पहचान जमीनी स्तर से की जाए।
राहुल ने कहा एकजुट होने को
राहुल गांधी ने राज्य के प्रतिनिधियों से जमीनी हालात का भी जायजा लिया। राहुल ने कांग्रेस नेताओं को एकजुट होकर लोकसभा चुनाव में पार्टी की जीत तय करने को कहा।
राहुल से मिलने वालों में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, मंत्री इंदिरा ह्दयेश, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, प्रीमत सिंह के अलावा संगठन से सूर्यकांत धस्माना, धीरेन्द्र प्रताप, विजय सारस्वत आदि मौजूद थे।