सूचना के अधिकार अधिनियम के नोडल सामान्य प्रशासन विभाग ने उत्तराखंड के सूचना आयुक्तों की पेंशन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।
आरटीआई के तहत आपदा राहत घोटाले के खुलासे के बाद यह राज्य सूचना आयोग पर सीधा हमला भी माना जा रहा है। पेंशन रोकने के पीछे शासन ने सीमित संसाधन होने का तर्क दिया है।
हालांकि प्रदेश सरकार मुख्य सूचना आयुक्तों को पेंशन के अतिरिक्त 14 हजार रुपए अलग से भी दे रही है। इसके अलावा सेवा का अधिकार आयोग सहित आधा दर्जन आयोग हैं जिनमें सरकार पेंशन का लाभ दे रही है।
सामान्य प्रशासन के प्रभारी सचिव शैलेश बगोली की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि संवैधानिक निकायों केपदधारको को पेंशन का लाभ देने से प्रदेश सरकार के राजकोष पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इससे विकास कार्यों के लिए आर्थिक संसाधनों की कमी होगी।
इसे देखते हुए ही प्रदेश सरकार ने 2005 में अंशदायी पेंशन योजना शुरू की थी। राज्य सरकार इस स्थिति में नही है कि राज्य सूचना आयुक्तों को पेंशन लाभ दे सके। शासनादेश में स्पष्ट कर दिया गया है कि राज्य सूचना आयुक्तों को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन नहीं दी जाएगी और इस आदेश को जारी करने में कार्मिक, न्याय और वित्त्त की सहमति ले ली गई है।
सरकार के इस फैसले को राज्य सूचना आयोग पर सीधा हमला भी माना जा रहा है। कुछ दिन पहले ही सूचना के अधिकार अधिनियम में राज्य सूचना आयुक्त ने आरटीआई एक्टिविस्ट भूपेंद्र कुमार की अपील पर आपदा राहत घोटाले की सीबीआई जांच का आग्रह किया था।