इस पर बैठक में मौजूद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अधिकारियों को कमेटी का गठन कर 15 दिन में जांच पूरी करने के आदेश दिए थे। हद यह हुई कि इस मामले में कमेटी का गठन ही चार दिसंबर को यानी 19 दिन बाद हुआ। सांसद प्रतिनिधि मोहन नेगी अब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करने की तैयारी कर रहे हैं।
कार्यवृत्त देर से जारी किया, आधा अधूरा ही बनाया
पहले तो बैठक का कार्यवृत्त ही देर से जारी हुआ। इसके बाद कमेटी का गठन ही चार दिसंबर को हुआ। जांच अभी जारी है और कार्यवृत्त में प्रतिनिधि के रूप में उठाई गई बहुत सारी बातों को शामिल ही नहीं किया गया। यहां तक की टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह की ओर से उठाए गए मामलों को भी कार्यवृत्त में शामिल नहीं किया गया। अब इसकी शिकायत सीएम से की जाएगी।
- मोहन नेगी, प्रतिनिधि, राज्यसभा सदस्य राजबब्बर