बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विस्तृत अध्ययन के लिए जो कमेटी गठित की गई है। उसमें राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों के कुलपति, निदेशक उच्च शिक्षा, उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा, उन्नयन समिति व शासन स्तर के अधिकारी बतौर सदस्य शामिल रहेंगे।
चर्चा के दौरान उच्च शिक्षा विशेषज्ञों की ओर से यह भी बताया गया कि बहुविषयक शिक्षा के प्रावधान के तहत स्नातक तीन या चार वर्ष की अवधि की होगी। जिसमें छात्रों को किसी भी विषय या क्षेत्र में एक साल पूरा करने पर प्रमाणपत्र, दो साल पूरा करने पर डिप्लोमा, तीन वर्ष की अवधि के बाद स्नातक की डिग्री प्रदान की जाएगी। जबकि चार वर्ष के कार्यक्रम में शोध सहित डिग्री प्रदान की जाएगी। पीएचडी के लिए या तो स्नातकोत्तर डिग्री या शोध के साथ चार वर्ष की स्नातक डिग्री अनिवार्य होगी।
इसके अलावा नई शिक्षा नीति के तहत तीन प्रकार के शिक्षण संस्थान होंगे। जिसमें अनुसंधान विश्वविद्यालय, शिक्षण अनुसंधान, स्वायत्त महाविद्यालय शामिल हैं। इसमें एफिलेटिंग विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों का कंसेप्ट समाप्त हो जाएगा।