हाईकोर्ट ने रुड़की नगर निगम क्षेत्र में आसिफ नगर गांव को शामिल करने, पाडली तथा रामपुर गुज्जर को बाहर करने के मामले में शहरी विकास विभाग की 6 दिसंबर 2018 को जारी अधिसूचना पर रोक लगा दी है। साथ ही न्यायालय ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने सुनवाई की।
रुड़की निवासी रियाज कुरैशी, आनंद सिंह तोमर और यशपाल राणा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2015 में राज्य सरकार ने पाडली और रामपुर गुज्जर गांव को नगर निगम में शामिल किया था। हाईकोर्ट ने अधिसूचना निरस्त की तो सरकार ने छह दिसंबर 2018 को गांवों को नगर निगम से बाहर करने की अधिसूचना जारी कर दी।
एक बार नगर निगम में शामिल होने के बाद गांवों को सीमा क्षेत्र से बाहर करने का कोई प्रावधान नहीं है। इन गांवों को निगम से बाहर करने का कोई कारण भी नहीं बताया गया। हाईकोर्ट की एकलपीठ के समक्ष सचिव शहरी विकास शैलेश बगौली पेश हुए और मामले से संबंधित दस्तावेज कोर्ट के समक्ष रखे।