याचिका में कहा गया था कि सरकार ने केंद्र सरकार की अनुमति मिले बिना ही देहरादून महानगर परियोजना लागू कर दी और प्राकृतिक जल की निकासी का कोई मानक नहीं रखा। याचिका में कहा कि महायोजना में लगभग 124 एकड़ भूमि को खुर्दबुर्द कर दिया गया है।
जिसमें विशेषकर टी स्टेट स्थित चाय बागान को जेसीबी मशीन द्वारा अन्यत्र स्थापित कर दिया गया। इस प्रकरण में राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि महानगर परियोजना बनाते समय उन्होंने अनुमति लेने के लिए 16 सितंबर 2005 को केंद्र सरकार को पत्र भेजा था, लेकिन केंद्र सरकार ने तीन साल तक अनुमति नहीं दी, जिस कारण वर्ष 2008 व 2013 में सरकार ने माहयोजना लागू कर दी।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महायोजना पास करने वाले अधिकारियों पर 5 लाख रूपये का अर्थदण्ड लगाया । कोर्ट ने देहरादून की 2005 से 2025 तक की महायोजना को भी निरस्त कर दिया। वहीं देहरादून के टी स्टेट को पूर्व की तरह बनाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी आदेशित किया है कि मास्टर प्लान बनाते समय सभी स्थानों व नियमों का ध्यान रखा जाय।