मामले के अनुसार धमेंद्र कंसल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि अधिनियम की धारा 7 (5) के तहत सिगरेट के प्रत्येक पैकेट पर निकोटीन और टार की मात्रा का विवरण दिया जाना चाहिए।
इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से दायर जवाब में भी यह माना गया कि निकोटीन और टार स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। इसकी थोड़ी सी मात्रा भी नुकसानदायक है।
पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा है कि केंद्र सरकार छह माह के भीतर यह तय करे कि सिगरेट एवं तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 की धारा सात की उपधारा पांच को लागू किया जा सकता है या नहीं।