सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि एलकेजी और यूकेजी कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों को किस तरह से ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि कितने प्रतिशत बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं तथा कितने स्कूल यह सुविधा दे रहे हैं। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए यह बताने को कहा है कि प्रदेश भर में कितने छात्र छात्राएं ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं। कोर्ट ने पूछा कि उत्तराखंड में स्कूलों और अभिभावकों के पास ऑनलाइन पढ़ाई की क्या सुविधा है।
याचियों ने कहा-पांचवीं तक के बच्चों से न ली जाए कोई फीस
मामले के अनुसार देहरादून निवासी जपिंदर सिंह व आकाश यादव ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि निजी और सरकारी स्कूलों में स्थिति सामान्य होने के बाद ही ट्यूशन फीस ली जाए तथा ट्यूशन फीस के नाम पर अन्य कोई शुल्क न लिया जाए। याचिका में यह भी कहा गया कि अगले सत्र में फीस में किसी तरह की वृद्धि न की जाए। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि कक्षा 5 तक के बच्चों से किसी तरह का कोई शुल्क न लिया जाए।