प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दायर जनहित याचिकाओं की अर्जेंट सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में जो उपनल कर्मचारी हैं, उनकी वहीं खाने व रहने की व्यवस्था की जाए। उनके घर जाने से उनका परिवार प्रभावित हो रहा है।
सुशीला तिवारी अस्पताल में रामनगर से आने वाले कोरोना पीड़ितों का भार बढ़ रहा है इसलिए रामनगर में भी एक कोविड सेंटर बनाया जाए। सरकार इस पर शीघ्र विचार करें। आईसीएमआर की गाइड लाइन के अनुसार कोविड सेंटर, हेल्थ सेंटर व केयर सेंटरों में कोरोना पीड़ितों का इलाज होना था जिनमें प्राइवेट अस्पताल भी शामिल हैं। ये प्राइवेट हॉस्पिटल ऐसे कोरोना पीड़ितों का रजिस्ट्रेशन नहीं कर रहे हैं जिनका ऑक्सीजन लेवल 92 से कम हो गया है। जिस पर कोर्ट ने प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है जो पीड़ितों की शिकायतों को सुनेंगे और कार्यवाही करेंगें।
कोर्ट ने प्रत्येक जिले में एक कोविड से संबंधित हेल्थ पोर्टल बनाने को कहा है जो हर घंटे में हेल्थ से संबंधित व हॉस्पिटलों में आक्सीजन बेड, दवाओं सहित अन्य जानकारी लोगों को देगा। कोर्ट ने मरीजों से अधिक चार्ज लेने वाले एंबुलेंस मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई करने को कहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में वेक्सीनेशन के लिए नेट न चलने से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने में दिक्कत आ रही है और उन्हें वैक्सीन नही लग पा रही है। ऐसे में उन्हें बिना रजिस्ट्रेशन के वैक्सीन लगाई जाए। कहा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजरी हो रही है। इसे रोकने के लिए कोर्ट ने ड्रग्स इंस्पेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि इस पर क्यूआर कोड लगाया जाए, जिससे इसकी कालाबाजारी पर रोक लग सके।