वरुणावत ट्रीटमेंट के दौरान हुई गड़बड़ियों का लोकायुक्त की जांच में खुलासा होने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। इस संबंध में लोक सेवक संघ के संयोजक बुद्धि सिंह पंवार द्वारा दाखिल रिट पर हाईकोर्ट ने सरकार को वरुणावत मामले में चल रही विजिलेंस जांच तीन माह के भीतर पूरी करने के आदेश दिए हैं।
लोक सेवक संघ के संयोजक बुद्धि सिंह पंवार ने बताया कि वर्ष 2003 में जिला मुख्यालय पर तबाही मचाने वाले वरुणावत भूस्खलन की त्रासदी से उबरने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने ढाई सौ करोड़ का बजट दिया था। वरुणावत ट्रीटमेंट के तहत इस बजट में भारी गोलमाल किया गया। उनकी शिकायत पर इस कार्य की लोकायुक्त जांच की गई थी।
लोकायुक्त जांच में वर्ष 2007 में करोड़ों का घोटाला सामने आया था। इस पर निर्माण कंपनी से 1.60 करोड़ रुपये की वसूली भी की गई थी, लेकिन न तो दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही घोटाले की रकम की पूरी वसूली हुई। तब उन्होंने मामले में हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। बीते 24 सितंबर को हाईकोर्ट ने इस पर फैसला देते हुए राज्य सरकार को वरुणावत मामले में चल रही विजिलेंस जांच तीन माह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। पंवार ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से घोटाले बाजों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता मजबूत हुआ है।