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बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, सरकार, पर्यटन सचिव को कोर्ट का नोटिस, यह है मामला

Thu, 13 Dec 2018 10:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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badrinath
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नैनीताल हाईकोर्ट ने बद्रीनाथ महालक्ष्मी मंदिर को सालाना ठेके पर डिमरी धार्मिक पंचायत को देने के मामले में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, सरकार और पर्यटन सचिव को नोटिस जारी किया है। इस मामले में तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी राकेश कौशिक ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 1999 में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बद्रीनाथ के महालक्ष्मी मंदिर को सालाना 35 हजार किराये में डिमरी धार्मिक पंचायत को ठेके पर दे दिया था।

याचिका में कहा गया है कि मंदिर समिति ने गैर कानूनी तरीके से मंदिर को निजी हाथों में सौंपा। याचिका में कहा कि मंदिर समिति की संपत्ति को किसी को सौंपा जाता है तो उसमें सरकार की अनुमति जरूरी है लेकिन मंदिर समिति अधिनियम की धारा-17 के तहत इस मामले में सरकार से अनुमति नहीं ली गई। न ही सरकार ने अनुमति दी। याचिका में मंदिर को डिमरी धार्मिक पंचायत से वापस लेने की मांग की गई थी।

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राज्य आंदोलनकारी घोषित करने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

प्रदेश सरकार की ओर से राज्य आंदोलनकारी घोषित करने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। याची की शिकायत है कि जिन लोगों का राज्य आंदोलन से कोई नाता नहीं रहा, सरकार ने उन्हें भी राज्य आंदोलनकारी घोषित किया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने सरकार को जवाब दाखिल करने और याची को प्रति शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया।

देव भूमि वृद्धा आश्रम निर्माण एवं विकास समिति ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि कई लोगों को समाचार पत्रों की कतरनों के आधार पर राज्य आंदोलनकारी बना दिया गया है। इन लोगों को राज्य सरकार की ओर से पेंशन, नौकरी समेत अन्य लाभ दिए जा रहे हैं। कई ऐसे लोगों को भी राज्य आंदोलनकारी घोषित कर दिया जिनका राज्य आंदोलन से कोई नाता नहीं रहा। याची ने ऐसे आंदोलनकारियों के मामलों की सीबीआई जांच की मांग की है। खंडपीठ अब पूरे मामले की दो सप्ताह के बाद सुनवाई करेगी।
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