हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति आलोक सिंह की कोर्ट ने गंगा नदी के पानी के दूषित होने पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले को रजिस्ट्रार जनरल नरेंद्र दत्त को भेजा है। रजिस्ट्रार से कहा गया है कि वह इस मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करें और मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ के समक्ष पेश करें ताकि इसमें उचित आदेश पारित हो सके।
अदालत के संज्ञान में आया है कि ऋषिकेश और हरिद्वार शहर की गंदगी और सीवरेज गंगा में जा रहा है। गंगा को स्वच्छ रखने के लिए हाइकोर्ट और ट्रिब्यूनल ने कई आदेश पारित किए हैं। बहुत सी योजनाएं और प्रोजेक्ट भी चलाए गए हैं।
इसके बावजूद राज्य सरकार व संबंधित विभाग कुछ नहीं कर रहे हैं। गंगा को स्वच्छ रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नमामि गंगे योजना भी बनाई है। मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने चीफ सेक्रेटरी उत्तराखंड सरकार, प्रिंसिपल सेक्रेटरी पेयजल, सिंचाई, अध्यक्ष पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड, हरिद्वार और देहरादून के डीएम-एसएसपी जबकि केंद्र के अधिवक्ता राकेश थपलियाल ने निदेशक नमामि गंगे परियोजना के नाम का नोटिस ले लिया है। कोर्ट ने दो मई तक इस संबंध में जवाब देने को कहा है।