केंद्रीय चुनाव आयोग को उत्तराखंड हाइकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वहीं दायर अपील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने करारा जवाब दिया है। हाईकोर्ट का कहना है कि अगर किसी को भी ईवीएम या चुनाव आयोग की आलोचना करने का अधिकार नहीं है।
बता दें कि ईवीएम में छेड़छाड़ साबित करने की राजनीतिक दलों को उसकी चुनौती को हरी झंडी देने के साथ ही हाल में हुए विधानसभा चुनावों को निष्पक्षता से कराने के लिए उच्च न्यायालय ने आयोग की सराहना की है।
इसी के साथ कोर्ट ने ईवीएम में छेड़छाड़ संबंधी परिणाम आने तक किसी भी माध्यम से ईवीएम की आलोचना किए जाने पर रोक लगा दी है। अदालत ने ईवीएम में छेड़छाड़ के मामले में केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसके आदेशों पर कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों को किसी भी संवैधानिक संस्था की साख को धक्का पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद शर्मा के समक्ष हुई। कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए और व्यापक जनहित के मद्देनजर सभी हाल में हुए विस चुनावों के संदर्भ में राज्यों के राजनीतिक दलों, अन्य राजनीतिक दलों, एनजीओ या व्यक्तिगत रूप से ईवीएम के प्रयोग की आलोचना पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने कहा है कि इस संबंध में चुनाव आयोग का फैसला आ जाने तक कोई भी व्यक्ति इलेक्ट्रानिक माध्यम, प्रेस, रेडियो, फेसबुक, ट्विटर इत्यादि के जरिये ईवीएम की आलोचना नहीं कर सकता है। नैनीताल निवासी डा. रमेश पांडे ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि चुनाव आयोग केवल चुनाव करा सकता है। चुनाव के बाद यदि कोई गलती मिलती है तो उस पर कोर्ट कार्रवाई कर सकता है।