बृहस्पतिवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने याची के अधिवक्ता से कहा कि आप फिल्म को ना देखें । आप लोगों ने पहले भी पद्मावत फिल्म पर विवाद छेड़कर उसे सुपर हिट बना दिया था।
खंडपीठ ने मामले में राज्य सरकार की ओर से पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में बनाई गई उच्च अधिकार प्राप्त कमेटी के गठन का हवाला दिया और फिल्म के प्रदर्शन से संबंधित निर्णय कमेटी पर छोड़ा। खंडपीठ ने कहा कि रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी अपने विवेक का इस्तेमाल कर अपने निहित अधिकारों में कानून व्यवस्था के बिगड़ने की स्थिति आने पर इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा सकते हैं।
केदारनाथ फिल्म के रिलीज होने पर रोक लगाई जाए। फिल्म लव जिहाद को बढ़ावा देती है। फिल्म की पटकथा में केदारनाथ के प्रति हिंदू आस्था और मान्यता पर चोट की गई है। फिल्म को लेकर हिंदू संगठनों और तीर्थ पुरोहितों की आपत्ति को देखते हुए प्रदेश सरकार पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर चुकी है। समिति केदारनाथ फिल्म को लेकर की जा रही आपत्तियों का परीक्षण कर रिपोर्ट देगी।
दर्शन भारती कोर्ट के फैसले से आहत
उच्च न्यायालय से मुझे निराशा हाथ लगी है। केदारनाथ धाम देश और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इष्ट देव हैं। आज केदारनाथ का अपमान होने जा रहा है। इसलिए फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। तन मन के साथ फिल्म रिलीज को रोकने के लिए शरीर भी देना पड़े तो मैं तैयार हूं ।
- स्वामी दर्शन भारती, याची, कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया से बातचीत
केदारनाथ त्रासदी वर्ष 2013 को केंद्र में रखकर एक प्रेमकथा पर बनी फिल्म ‘केदारनाथ’ के उत्तराखंड में रिलीज होने पर पेंच फंस गया है।
प्रदेश में फिल्म के कई दृश्यों पर आपत्ति और विरोध की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है।
समिति में डीजीपी अनिल रतूड़ी, सचिव गृह नितेश झा और सचिव सूचना दिलीप जावलकर शामिल हैं। यह समिति फिल्म के सात दिसंबर को रिलीज होने से पहले अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी।