- राज्य सरकार मानसिक रूप से बीमार बच्चों और अन्य रोगियों के पुनर्वास के लिए नीति बनाए। राज्य सरकार छह माह के अंदर मानसिक रूप से बीमार बच्चों के पंजीकरण के लिए नीति बनाए।
- प्रदेश के सभी जिलों के एसएसपी और एसपी यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रदेश में किसी भी मानसिक रोगी का उपचार तांत्रिक, झोलाछाप डाक्टरों के यहां न हो और किसी भी मानसिक रोगी को घर तक में एकांत में बंद करके न रखा जाए।
- छह माह के अंदर बंगलूरू स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ की मदद से राज्य में सर्वे कराया जाए
- राज्य सरकार मानवाधिकार, नीति, विधि और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित केंद्र स्थापित करे
- तीन माह के अंदर मेंटल हेल्थ केयर एक्ट, 2017 केतहत प्रदेश सरकार प्राधिकरण और आठ सप्ताह में मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड का गठन करे।
- मानसिक रूप से बीमार लोगों को प्रदेश सरकार बिना किसी भेदभाव के सर्वसुलभ, बेहतर और सस्ता उपचार उपलब्ध कराए
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं में प्रदेश सरकार मानसिक स्वास्थ्य सेवा को सभी स्तर पर शामिल करे।
- सरकार यह सुनिश्चित करे कि मानसिक रूप से बीमार लोगों का दूरदराज केक्षेत्रों में तबादला न किया जाए।
- मानसिक व्याधियों की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए प्रदेश सरकार योजनाओं का क्रियान्वयन करे।
- मेंटल हेल्थ केयर एक्ट, 2017 का व्यापक प्रचार किया जाए।
- कोई भी अपंजीकृत संस्था मानसिक रोगों का उपचार न करने पाए
- जेल अधिकारी प्रत्येक तिमाही संबंधित बोर्ड को रिपोर्ट भेजकर सत्यापित करें कि जेल में कोई मानसिक रोगी बंद नहीं है।
- पुलिस थानाक्षेत्र में धूमते हुए पाए गए किसी भी मानसिक रोगी को पुलिस अधिकारी अपनी अभिरक्षा में लें और उसे निकटम स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराएं।
- यह प्रत्येक पुलिस अधिकारी का दायित्व होगा कि किसी भी मानसिक रोगी के उत्पीड़न की रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को करे।
- राज्य सरकार मानसिक रोग उपचार के लिए अन्य केंद्र भी स्थापित करे
- छह माह के अंदर प्रदेश सरकार प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर स्थापित करे