फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand: हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, सरकार से पूछा-प्रतियोगी परीक्षाओं में क्यों हो रहे बार-बार घपले?

Fri, 17 Feb 2023 09:55 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल

सार

हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार, सीबीआई और डीजीपी को 11 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
विज्ञापन
कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में प्रतियोगी परीक्षा पेपर लीक मामलों की जांच सीबीआई से कराने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार घपला क्यों हो रहा है।

विज्ञापन


Uksssc: 900 से ज्यादा पदों पर चयन निरस्त करने का मामला, हाईकोर्ट ने रिपोर्ट न देने पर जताई नाराजगी

हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार, सीबीआई और डीजीपी को 11 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
विज्ञापन


मामले के अनुसार देहरादून निवासी विकेश सिंह नेगी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य में पिछले कुछ दिनों से छात्र यूकेएसएसएससी और यूकेपीएससी पेपर लीक होने के कारण सड़कों पर हैं। पुलिस बेरोजगार युवाओं पर लाठीचार्ज कर रही है और सरकार इस मामले में चुप्पी साधे है।

विज्ञापन

याचिका में कहा गया कि छात्रों को जेल तक भेज दिया गया है और सरकार पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।

याचिकाकर्ता का कहना था कि स्थानीय पुलिस और एसटीएफ पर उन्हें विश्वास नहीं है। राज्य में बीडीओ भर्ती, लेखपाल भर्ती व पटवारी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। यूके पीसीएस की परीक्षाओ में भी घपला हुआ है।

जनहित याचिका में कहा गया कि हिमाचल में कांस्टेबल भर्ती की सीबीआई जांच हुई, जिसके तार देहरादून और हरिद्वार तक जुड़े मिले। हिमाचल सरकार ने उसकी जांच सीबीआई से कराई लेकिन उत्तराखंड सरकार इतने पेपर लीक होने के बाद भी इसकी जांच सीबीआई से नहीं करा रही है। याचिकाकर्ता ने इस प्रकरण की जांव सीबीआई से कराने की मांग की है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें