आए दिन मारपीट करते थे परिजन
उसके परिजन भाई साजिद के नाम पर रजिस्ट्री करने का दबाव बनाने लगे। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनका उत्पीड़न शुरू हुआ। परिजन उसके साथ आए दिन मारपीट करते थे और भाई उसे जान से मारने की धमकी देता था। ऐसे में उन्होंने अपने परिवार से सभी रिश्ते तोड़ने का फैसला लिया और 24 दिसंबर 2022 को हल्द्वानी स्थित आर्य समाज मंदिर में सनातन धर्म अपनाया। कहा उन्होंने ऐसा कदम किसी के दबाव में नहीं बल्कि परिवार के उत्पीड़न से तंग आकर लिया।
कहा जिस घर में बेटियों का सम्मान नहीं होता उस घर से किनारा करना ही सही है। वहीं इस बारे में रोशनी के पिता बसीर अहमद ने साफ तौर पर कहा कि बेटी के सभी आरोप निराधार हैं। कहा मैंने पूरी जिम्मेदारी से बेटी को पढ़ाया और बरेली से जीएनएम कराते हुए उसे अपने पैरों पर खड़ा किया। हल्द्वानी में मकान भी दिलवाया। बेटे के नाम पर मकान की रजिस्ट्री करने के दबाव का आरोप गलत है। हमें लगता है कि इसके पीछे उसे कोई भड़का रहा है, जिसका पता लगाने की वह कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती थीं रोशनी
रोशनी ने कहा उनका बचपन से प्रशासनिक सेवा में जाना सपना था, जिसके लिए वह तैयारी में जुटीं थीं। वह छोटी बहन के साथ घर की भी पूरी जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं। लेकिन परिजनों ने उनका साथ नहीं दिया। उनका मानना था कि यदि उनकी प्रशासनिक सेवा में तैनाती हो गई तो उन्हें उनसे पैसा नहीं मिलेगा। ऐसे में उन्हें अपने सपने को तोड़ना पड़ा।
प्रशासन का जताया आभार
रोशनी ने रानीखेत पुलिस व प्रशासन का आभार जताया है। उन्होंने कहा जब उन्होंने सनातन धर्म अपनाया तो उन्हें परिजनों से लगातार धमकियां मिल रहीं थीं। ऐसे में उन्हें पुलिस प प्रशासन का पूरा सहयोग मिला और वह फिर से अपने जीवन को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटी हैं।