मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश के सफाई कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अब उनका हर महीने कटने वाला एक दिन का वेतन नहीं कटेगा। उन्होंने सचिव वित्त को इसके निर्देश जारी किए हैं। इस घोषणा से प्रदेश के हजारों सफाई कर्मचारी लाभांवित होंगे।
मेयर गामा ने मुख्यमंत्री को बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटा जा रहा है। इसमें सफाई कर्मचारी भी शामिल हैं। कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही जंग में सफाई कर्मचारी दिन-रात जुटे हैं। ये कोरोना वारियर्स अपनी जान की परवाह किए बगैर सफाई कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।
ऐसे में वेतन कटने से सफाई कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा। जिस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिव वित्त को प्रदेश के सभी नगर निगम एवं स्थानीय निकायों में काम करने वाले सफाई कर्मचारियों का एक दिन का वेतन न काटने के निर्देश दिए गए। इस दौरान मेयर ऋषिकेश अनिता ममर्गाईं, मेयर काशीपुर ऊषा तथा मेयर रुद्रपुर रामपाल सिंह भी मौजूद रहे।
सफाई कर्मचारियों ने जताया मेयर का आभार
एक दिन का वेतन न काटे जाने के निर्णय का सफाई कर्मचारियों ने स्वागत किया है। राष्ट्रीय सफाई मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश वैद्य ने कहा कि बीते दिनों उन्होंने सफाई कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने से होने वाली दिक्कतों को लेकर मेयर सुनील उनियाल गामा से मुलाकात की थी। आज मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा कर दी है। इस निर्णय से सफाई कर्मचारियों को काफी राहत मिली है।
नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल अधिनियम 1985 के अंतर्गत केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल की तरह ट्रिब्यूनल बनाने के आदेश सरकार को दिए हैं। साथ ही मुख्य सचिव(सीएस) को इस मामले में चार माह में एक्शन टेकन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने महाधिवक्ता के इस तर्क को स्वीकार किया है कि पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल को नियमों की वैधानिकता तय करने का अधिकार नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार वन विभाग के श्यामलाल व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली के प्रावधानों को चुनौती देते हुए निरस्त करने की मांग की थी।
कोर्ट ने महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर से कोर्ट की मामले में सहायता का अनुरोध किया था। महाधिवक्ता का तर्क था कि ट्रिब्यूनल को रूल्स की वैधानिकता तय करने का अधिकार नहीं दिया गया है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल की तरह ट्रिब्यूनल बनाने के आदेश सरकार को दिए हैं।