इसी के जवाब में बुधवार को प्रदेश सरकार ने कोर्ट में केंद्र सरकार के साथ बैठक का हवाला दिया और कहा कि एनआईटी को सुमाड़ी में ही रहने देने की संभावना तलाश की जा रही है।
याची जसवीर का कहना था कि एनआईटी को हाइवे के किनारे स्थापित किया गया है। इससे कई छात्र तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ रहे हैं। संस्थान का अपना परिसर नहीं है और सरकार की उपेक्षा का ही सबब है कि संस्थान में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को जयपुर एनआईटी में प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।
पूर्व में इसी मामले में श्रीनगर के सुमाड़ी, नियाल सहित अन्य गांवों के लोगों ने पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी। इनका कहना था कि संस्थान के लिए उन्होंने अपनी जमीन दान में दी और अब सरकार इस संस्थान को मैदान में ले जाने का प्रयास कर रही है। इसी पर पूर्व में कोर्ट ने कहा था कि सरकार का यही हाल रहा तो यह संस्थान उत्तराखंड के हाथ से निकल जाएगा।