श्रम मंत्री ने बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष सत्याल को भी निशाने पर लिया। हरक सिंह ने कहा कि वर्तमान बोर्ड के अध्यक्ष की अज्ञानता ही है कि उन्होंने बिना प्रक्रिया अपनाए दमयंती रावत को सचिव पद से हटाया। पूर्व में बोर्ड ने बैठक कर प्रस्ताव पारित किया था और श्रम मंत्री के अनुमोदन के बाद शासन ने उन्हें बोर्ड का सचिव बनाया था। उन्हें पद से मुख्यमंत्री, शासन या बोर्ड अध्यक्ष नहीं हटा सकता।
कैबिनेट का दिया उदाहरण
श्रम मंत्री ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए कैबिनेट का उदाहरण दिया। हरक ने कहा कि मुख्यमंत्री को असीमित अधिकार हैं, लेकिन किसी प्रस्ताव के लिए उन्हें कैबिनेट की प्रक्रिया से गुजरना ही होता है। हरक सिंह ने दावा किया कि उन्होंने यह बात मुख्यमंत्री से भी कही है।