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शराबबंदी के आंदोलन से सरकार को भारी नुकसान, राजस्व में आई कमी

Wed, 03 May 2017 02:49 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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अप्रैल माह के दौरान आबकारी विभाग को राजस्व के  मद में 174 करोड़ रुपये का झटका झेलना पड़ा है। अप्रैल माह के दौरान विभाग को 91 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, जबकि पिछले साल अप्रैल माह के दौरान विभाग को 265 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ था। इस लिहाज से विभाग को 174 करोड़ रुपये का राजस्व कम हासिल हुआ है। शराब की दुकानें नहीं खुलने से मई माह के दौरान भी विभाग को राजस्व का लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद नहीं है। 
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नई आबकारी नीति तैयार नहीं होने की वजह से अप्रैल माह के दौरान शराब की दुकानों का आवंटन पुरानी आबकारी नीति के आधार पर किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में स्थित शराब 402 दुकानों को बंद करना पड़ा।
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शराब की 526 दुकानों में करीब 330 ही खुल सकीं

तमाम कोशिशों के बाद भी आबकारी विभाग सभी दुकानों को हाईवे से 500 मीटर की अधिक दूरी पर शिफ्ट करने में कामयाब नहीं हो सका। शराब की दुकानों को बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने स्टेट हाईवे को डीनोटिफाई भी कर दिया। इसके बाद भी 35 दुकानें ही बच सकी। अप्रैल माह के दौरान पूरे प्रदेश में शराब की 526 दुकानों में करीब 330 ही खुल सकीं।

शराब की दुकानों के विरोध का यह असर था कि ठेकेदार एक माह के लिए दुकान खोलने को तैयार नहीं हुए। इस स्थिति में दैनिक आधार पर दुकानों का आवंटन करना पड़ा। दैनिक आधार पर शराब की दुकानों को आवंटित करने में भी विभाग को अधिक कामयाबी नहीं मिल सकी।

तमाम कोशिशों के बाद भी विभाग को अप्रैल माह के दौरान 91 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई आबकारी लागू नहीं होने और शराब की दुकानों का आवंटन नहीं होने से राजस्व कम प्राप्त हुआ है।  
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