जिले की आबादी में 52 फीसदी भागीदारी के बावजूद महिलाओं को जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं नसीब नहीं हो पा रही है। केदारघाटी के अस्सी से अधिक गांवों की महिलाएं जहां जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम है वहीं, जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग सहित पूरे जिले में एक भी महिला विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है।
हालात यह हैं कि महिलाओं के स्वास्थ्य से संबधित 75 फीसदी मामले अन्यत्र चिकित्सालयों में रेफर किए जाते हैं। जिले में प्रतिवर्ष 900 से 1100 बच्चे जन्म ले रहे हैं, लेकिन अधिकांश महिलाओं का प्रसव जिले के बाहर के अस्पतालों में हो रहा है। स्थिति यह है कि गौरीकुंड से लेकर गुप्तकाशी क्षेत्र के ग्रामीणों को खून जांच, एक्सरे और अन्य प्राथमिक जांचों के लिए जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिला चिकित्सालय में 22 में से 11 पद रिक्त
जिले में जिला चिकित्सालय समेत दो सीएचसी और दो पीएससी सहित 42 छोटे-बड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन इनमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ व संसाधनों का टोटा बना हुआ है। जिला अस्पताल में जहां चिकित्सकों के 22 में 11 पद खाली है, वहीं, सीएचसी अगस्त्यमुनि में मात्र तीन डॉक्टर हैं।
वहीं, पूरे जिले में चिकित्सकों के 60, फार्मेसिस्ट के 30 से अधिक और एएनएम के 21 पद खाली है, जिस कारण लाखों की लागत से बने अधिकांश स्वास्थ्य केंद्र शोपीश बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी बुरी है। गौंडार, तोषी, बुरूआ समेत 50 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को बुखार की दवा और बच्चों के टीकाक रण के लिए छह से आठ किमी की दौड़ लगानी पड़ रही है।