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यूपी के 30 दिन पड़े उत्तराखंड के राज्यपाल पर भारी

Tue, 12 Aug 2014 12:06 PM IST
अनूप वाजपेयी / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी पर जिन बयानों को लेकर इस्तीफे का दबाव है उसका सीधा ताल्लुक यूपी से है।
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यूपी में बतौर राज्यपाल तीस दिन का उनका कार्यकाल विवादों और उनके बयानों के कारण हमेशा याद रहेगा। डॉ. कुरैशी करीब सवा दो साल से उत्तराखंड के राज्यपाल हैं।

इस दौरान न तो उनकी प्रदेश सरकार से किसी मुद्दे को लेकर खींचतान हुई है और न ही उनके किसी बयान से तूफान उठा।

इस दौरान कांग्रेस सरकार के दो मुख्यमंत्रियों विजय बहुगुणा और हरीश रावत के साथ उनके रिश्ते भी बेहतर रहे हैं।

यूपी की राजनीति में कुरैशी का बयान

लखनऊ में राज्यपाल की शपथ के तुरंत बाद आया डॉ. कुरैशी का बयान यूपी की राजनीति में गरमी ले आया था।

राज्यपाल ने दो घंटे जनता दरबार लगाने की बात कह प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार से सीधा मोर्चा खोला। जिस पर वहां मंत्री शिवपाल यादव और वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल ने राज्यपाल को अपना काम करने की नसीहत दे डाली थी।

डॉ. कुरैशी ने अल्प कार्यकाल में यूपी के मंत्री आजम खां के पिता के नाम पर चल रही मोहम्मद अली गौहर यूनिवर्सिटी की सालों से लंबित अल्पसंख्यक वर्ग की मान्यता फाइल पर मुहर लगा दी।

जबकि इस मामले उसने पूर्व दो राज्यपालों टीवी. राजेश्वर और बीएल. जोशी ने भी रोककर रखा था।
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पूर्व राज्यपालों के खिलाफ भी की थी बयानबाजी

इतना ही नहीं मान्यता पर हस्ताक्षर करने के बाद डॉ. कुरैशी ने पूर्व राज्यपालों के खिलाफ भी बयानबाजी की। उन्होंने कहा कि किसी ने गलत किया है तो क्या मैं भी उनके नक्शे कदम पर चलूं।

लखनऊ से लौटने के कुछ दिनों पूर्व उन्होंने निर्देश जारी किए प्रदेश सरकार के सभी सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चित्र लगाया जाए।

हालांकि यह व्यवस्था प्रोटोकॉल के तहत प्रत्येक प्रदेश में होती है बावजूद डॉ. कुरैशी के बयान ने इसे भी राजनीतिक रंग दिया।
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