यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खां चौदह बरस तक खुली आंखों से जौहर विवि को अल्पसंख्यक संस्थान बनाने और स्वयं को आजीवन कुलाधिपति बनने का सपना देखते रहे।
केंद्र में यूपीए के दस साल के शासनकाल में भी किसी राज्यपाल ने जौहर विश्वविद्यालय रामपुर के इस विधेयक को मंजूरी नहीं दी, लेकिन कुछ दिन के लिए अतिरिक्त चार्ज पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के रूप में उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने इसकी मंजूरी दे दी।
बस यह निर्णय होना था और भाजपा नेताओं ने अपने हाईकमान को यही समझाया कि जो काम कांग्रेस के शासनकाल में नहीं हुआ वो केंद्र में भाजपा की सरकार आते ही हो गया। यूपी के भाजपा नेताओं ने नाराजगी ही जाहिर नहीं की बल्कि अपने नेतृत्व के सामने विरोध भी प्रदर्शित किया।
बस इतना होना था और अजीज कुरैशी केंद्र के निशाने पर आ गए। इसकेबाद तो एक के बाद एक सिलसिला शुरू हुआ और हर बात आज कुरैशी की विदाई पर खत्म हुई।