देहरादून में नदियों, तालाबों और नालों पर किए गए अतिक्रमण के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि सरकार अतिक्रमणकारियों को चिह्नित कर वहां से हटा रही है।
इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार अतिक्रमण के नाम पर सिर्फ गरीब लोगों को हटा रही है, जबकि रसूखदारों के अतिक्रमण नहीं हटाए जा रहे हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार राजपुर क्षेत्र की पार्षद उर्मिला थापा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि बीते वर्षों में राजपुर क्षेत्र के नालों, चाल-खालों और ढांग पर अत्यधिक अतिक्रमण और निर्माण कार्य किया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान देहरादून के डीएम ने शपथपत्र प्रस्तुत कर दून घाटी की नदियों के 270 एकड़ क्षेत्र में हुए अतक्रिमण को स्वीकारते हुए कहा कि देहरादून में 100 एकड़, विकासनगर में 140 एकड़, ऋषिकेश में 15 एकड़, डोईवाला में 15 एकड़ नदियों की भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। सरकार की ओर से कहा गया कि अतिक्रमण को हटाया जा रहा है।