आईआईटी रुड़की के पूर्व निदेशक प्रो. प्रेमव्रत ने कहा कि सकारात्मक तकनीक का विकास होना चाहिए न कि नकारात्मक तकनीक का। इसकी वजह आज का समाज तकनीक पर आश्रित होता जा रहा है। वह शुक्रवार को बतौर मुख्य अतिथि महिला तकनीकी संस्थान में टीईक्यूआईपी-3 व आईईईई की ओर से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विटकॉन ईसीई-2019 को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मानव समाज वास्तविक ज्ञान से दूर होकर पूरी तरह से तकनीकों के सहारे होता जा रहा है, इससे समाज के बौद्धिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उत्तराखंड तकनीकी विवि के कुलपति प्रो. एनएस चौधरी ने कहा कि तकनीकी विकास के लिए सभी को आगे आना होगा। वहीं, मदन मोहन तकनीकी विवि के कुलपति प्रो. एसएन सिंह ने कहा कि सम्मेलन के जरिए शोधार्थी अपने शोध को अन्य के साथ साझा करते हैं, जिससे शोध की गुणवत्ता में सुधार होता है। महिला तकनीकी संस्थान की निदेशक डॉ. अलकनंदा अशोक ने बताया कि 159 शोध पत्रों में से 50 प्रतिशत शोध पत्र काफी अच्छे हैं, जिसका प्रस्तुतीकरण शोध छात्र तीन अलग-अलग सत्र में करेंगे।
दुबई से आए प्रो. विनोद कुमार शुक्ला ने 4.0 तकनीक पर विस्तार से विचार रखे। प्रो. जी राम कुमार ने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क पर विचार रखे। सोनिया गर्ग ने उद्योगों में महिलाओं की भूमिका व रसायन उद्योग के बारे में विस्तार से बताया। वहीं, सोनाली ने शोध पत्र लिखने की तकनीक के बारे में व्याख्यान दिया गया। इस दौरान सम्मेलन पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। इससे पहले मुख्य अतिथि प्रो. प्रेमव्रत ने दीप जलाकर सम्मेलन की शुरुआत की।