देहरादून से दिल्ली तक पहुंचे हाईप्रोफाइल यौन शोषण प्रकरण में अपर सचिव जेपी जोशी के नाम पर शासन अब तक चुप बैठा है। मुख्य सचिव से लेकर सचिव तक कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं।
पूरा फोकस युवती पर
एफआईआर दर्ज होते ही जो सख्ती पीएचक्यू ने दिखाई थी वह भी अब ढीली दिख रही है। पुलिस की जांच का पूरा फोकस युवती पर है।
डीजीपी का कहना है कि युवती से पूछताछ हो चुकी है, गेस्ट हाउस जाकर कुछ और प्रक्रिया पूरी करनी है इसके बाद जोशी से पूछताछ होगी।
यौन उत्पीड़न से संबंधित इतना बड़ा मुद्दा उछलने के बाद भी शासन चुप है। मुख्यमंत्री का एक दिन निष्पक्ष जांच कराने का बयान जरूर आया लेकिन मुख्य सचिव से लेकर प्रमुख सचिव गृह व अन्य सभी अथॉरिटी चुप है।
सरकार नहीं चाहती जोशी की गिरफ्तारी हो
बार-बार यह सवाल उठ रहा है कि जब मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 के बयानों के आधार पर ही देश में कई अभियुक्त जेल गए।
लेकिन अपर सचिव जेपी जोशी को लेकर सरकार निष्पक्ष जांच की बात कहकर सरकार पल्ला झाड़ रही है। सरकार की मंशा साफ है, वह नहीं चाहती कि जोशी की गिरफ्तारी हो।
उधर, पीएचक्यू का जांच अभियान जारी है। जितनी सक्रियता जांच टीम गठित करने में दिखाई वह अब उतनी नहीं दिखती। वैसे तो पूरे मामले की निगरानी जिला पुलिस के बजाय डीजीपी बीएस सिद्धू कर रहे है।
जांच के लिए एक महिला एएसपी को पांच दिन की सीबीआई ट्रेनिंग के बीच में ही वापस बुला लिया गया। जबकि पीएचक्यू में एसपी व एसएसपी स्तर की महिला अफसर तैनात हैं।
समाप्त हुई जोशी की छुट्टी
अपर सचिव जेपी जोशी का मेडिकल अवकाश तीस नवम्बर को समाप्त हो रहा है। देखना यही है कि वह सोमवार से सचिवालय स्थित अपने कार्यालय आते है या फिर छुट्टी बढ़ाने का आवेदन भेजते है।
संभावना इस बात की है कि जोशी छुट्टी बढ़ाएंगे। हालांकि अभी तक छुट्टी बढ़ाने का आवेदन सचिवालय प्रशासन विभाग को नहीं मिला है।