व्यावसायिक भवनों के संपत्ति कर निर्धारण के संबंध में दो बार बैठक होने के बावजूद सरकार कोई निर्णय नहीं ले पाई है। कर निर्धारण के बारे में सरकार यूपी, हिमाचल के फेर में फंस गई है। सरकार असमंजस में है कि वह यूपी के एक्ट पर चले या हिमाचल के।
वर्तमान में भवन की निर्माण लागत और सर्किल रेट के आधार पर व्यावसायिक भवनों का संपत्ति कर निर्धारण किया गया है। ऐसे में सर्किल रेट बढ़ोत्तरी होने पर कर में वृद्धि होना स्वाभाविक है और यह हर साल बढ़ता जाएगा। इसीलिए व्यापारी सर्किल रेट के आधार पर टैक्स लगाने के पक्ष में नहीं हैं।
सरकार ने मांगी राय
इस कारण व्यावसायिक भवनों के टैक्स में रियायत देने के लिए अपर सचिव शहरी विकास डॉ. वी षणमुगम की अध्यक्षता में शासन स्तर पर बनी कमेटी ने साफ किया है कि टैक्स सर्किल रेट के आधार पर नहीं लगाया जाएगा। सवाल यह है कि सर्किल रेट नहीं तो किस आधार पर टैक्स लगेगा?
इस दुविधा से निकलने के लिए सरकार ने व्यापार मंडलों की राय मांगी है। बावजूद वह अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। हालांकि सरकार इसका ध्यान रख रही है कि जो भी एक्ट लागू हो उससे व्यापारियों को लाभ मिले।
इनका है कहना
अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। इतना तय है कि सर्किल रेट के आधार पर टैक्स नहीं लिया जाएगा, लेकिन आधार क्या होगा यह कुछ नहीं कहा जा सकता। यह नहीं कहा जा सकता कि किस तरह से व्यापारियों को लाभ मिल पाएगा। जो भी तय होगा वह कमेटी के अनुसार होगा।
-नितिन भदौरिया, नगर आयुक्त