प्रभु बदरीनाथ संसारी जनों की उलझनें तो सुलझाते रहते हैं लेकिन अब उन्हें सरकारी जनों की उलझनें भी सुलझानी होंगी, तभी उन तक पहुंचने का रास्ता बन पाएगा और उनके भक्त उनके दर पर आकर उनकी जय जयकार कर सकेंगे।
बदरीनाथ हाईवे केंद्र, राज्य, बीआरओ, पीडब्ल्यूडी...और कई दृश्य-अदृश्य शक्तियों के बीच उलझ गया है। इसकी बुरी हालत की सभी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर बच ले रहे हैं। किसी को भी बदरीनाथ का लिहाज नहीं। पिछले साल जून में आई आपदा तो गुजर गई लेकिन उससे बड़ी आपदा उसके बाद आई हुई है-सरकारी सुस्ती की।
चारधाम यात्रा आनन-फानन शुरू करवाने चक्कर में सरकार ने पानी निकासी का इंतजाम किए बिना ही बुरी तरह ध्वस्त हाईवे की कामचलाऊ मरम्मत करा दी थी जो फिर से तबाह है। ढोल पीट-पीटकर देश-दुनिया से लोगों को (सुरक्षित) उत्तराखंड बुलाने वाली मशीनरी सभी धामों में सबसे सुगम बदरीनाथ के लिए ही सवा साल बाद भी आवाजाही लायक रास्ता नहीं बना सकी है। बाकी दुर्गम धामों के लिए तो उम्मीद ही नहीं की जा सकती।
हाईवे का हाल, एक नजर में
-बदरीनाथ राजमार्ग पर जोशीमठ से कंचनगंगा तक 54 किलोमीटर हिस्सा खतरनाक बना हुआ है।
-जोशीमठ से आगे धाम की ओर लामबगड़ से बैनाकुली के बीच हाईवे का तीन किमी हिस्सा बेहद जर्जर।
-चमोली जिले में हेलंग, पीपलकोटी, गडोरा, पाताल गंगा, पागल नाला, मैठाणा में भी मार्ग बंद होता रहा।
-श्रीनगर-रुद्रप्रयाग के बीच सिरोहबगड़ में पहाड़ी से मलबा आने के चलते मार्ग अक्सर बंद हो जाता है।
-टिहरी जिले में भी कई जगह मार्ग खस्ताहाल। 15 अगस्त को यहां सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया था।