सरकार की ओर से बुधवार को कोर्ट में पेश किए गए शपथपत्र में कहा गया कि गंगा और यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कई तरह से काम किया जा रहा है। हरिद्वार, ऋषिकेश, मुनीकीरेती, तपोवन, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, बद्रीनाथ, केदारनाथ सहित अन्य स्थानों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए हैं।
याची का कहना था कि गंगा और यमुना नदी पर करोड़ों हिंदू लोगों की आस्था है। हिंदू रोज गंगा और यमुना नदी के पवित्र जल से आचमन व इस जल को मंदिरों में चढ़ाते है। गंगा और यमुना का पानी आचमन योग्य नही रह गया है और गंगा में जगह जगह गंदगी डाली जा रही है। कई जगह से सीवर का पानी भी गंगा में डाला जा रहा है।