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PPP मोड आउट, सरकार खुद करेगी गंगा की सफाई

Thu, 17 Dec 2015 11:26 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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नमामि गंगे अभियान के तहत उत्तराखंड में अब गंगा की सफाई पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड से नहीं होगी।
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पीपीपी मोड से गंगा को स्वच्छ किए जाने की योजना को राज्य सरकार ने नकार दिया है। इसके पीछे शासन का तर्क है कि पीपीपी मोड से गंगा की सफाई में देरी और खर्च अधिक बढ़ने का अंदेशा था। लिहाजा अब राज्य में सरकारी एजेंसियां ही गंगा में गिरने वाले सीवरेज को साफ करेंगी।

इस बाबत प्रदेश शासन ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर अपनी मंशा से अवगत करा दिया है और इसके लिए केंद्र से सात सौ करोड़ रुपये मांगे हैं। इस नई कार्ययोजना पर दिल्ली में होने वाली कैबिनेट सचिवों की बैठक में बृहस्पतिवार को चर्चा होगी।
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गंगा में गिर रहे सीवरेज को रोकने और ट्रीटमेंट के लिए पीपीपी मोड से कार्य कराने की योजना पर उत्तराखंड शासन ने असहमति जता दी है। इसे सिरे से खारिज करते हुए अपर मुख्य सचिव एस राजू ने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र भी भेज दिया है।

उत्तराखंड के पीपीपी मोड को खारिज करने के बाद यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल भी इसे खारिज कर सकते हैं। अब इससे जुड़ीं तमाम सरकारी एजेंसियां उत्तराखंड में सीवरेज ट्रीटमेंट और गंगा सफाई के संबंध में नई कार्ययोजना तैयार करेंगी।

अपर मुख्य सचिव एस राजू ने बताया कि बृहस्पतिवार को दिल्ली में कैबिनेट सचिवों की बैठक में नमामि गंगे अभियान के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट और सफाई के लिए नेटवर्किंग पर चर्च्रा होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश शासन ने केंद्र सरकार को 700 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी है, जिसके रिलीज होते ही परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा।

उधर, अभियान के तहत गंगा किनारे वनीकरण के लिए वन अनुसंधान संस्थान विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की खामियों को पूरा करते हुए इसे अंतिम रूप में देने में लगा है।
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नमामि गंगे अभियान से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड को हटाने के संबंध में केंद्र सरकार को पत्र भेजा जा चुका है। बृहस्पतिवार को दिल्ली में कैबिनेट सचिवों की बैठक में कार्ययोजना पर विचार विमर्श किया जाएगा।
- एस राजू , अपर मुख्य सचिव
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