केंद्र सरकार से पैसा मिलने के चक्कर में उत्तराखंड सरकार ने 341 गांवों को डेढ़ साल आपदा के खतरे में रखा।
जियोलोजिकल सर्वे आफ इंडिया, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने इन गांवों को कहीं और शिफ्ट करने के लिए प्रदेश शासन को डेढ़ साल पहले रिपोर्ट दी थी।
इन्हीं गांवों के नाम पर शनिवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऋषिकेश में ज्ञापन देकर 13000 हजार करोड़ रुपए मांगे थे, लेकिन पैसा मिलने की उम्मीद न देख अब प्रदेश शासन इन गांवों की नए सिरे से सूची बनवा रहा है।
वर्ष 2013 में आपदा के फौरन बाद जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने चमोली, उत्तरकाशी, रुद्र प्रयाग समेत प्रदेश के अन्य पर्वतीय जिलों का सर्वेक्षण किया था। रिपोर्ट शासन को भेजकर आगाह किया गया था कि 341 गांवों में भूस्खलन का खतरा है।
ये गांव कभी भी आपदा की चपेट में आ सकते हैं। इन्हें तत्काल कहीं और शिफ्ट किया जाए, लेकिन शासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। सर्वेक्षणों को दिखाकर केंद्र से पैसा मांगा गया कि इन गांवों को ‘सेफर जोन’ में पहुंचाने के लिए धनराशि आवंटित की जाए।
केंद्र सरकार से पैसा मिलने की उम्मीद धुंधली होती देखकर प्रदेश शासन ने अब अपने स्तर से इन गांवों के लिए कोशिश शुरू की है। नए सिरे से अत्याधिक संवेदनशील, अति संवेदनशील और संवेदनशील गांवों की सूची तैयार करवाई जा रही है। इस बाबत प्रदेश भर के जिलाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
प्रभारी सचिव आपदा प्रबंधन मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि इकट्ठे तो सारे गांवों की शिफ्टिंग और विकास कार्य नहीं हो सकते। जो गांव अत्याधिक संवेदनशील होंगे, वहां से काम शुरू किया जाएगा। जिलाधिकारियों की सूची आने के बाद काम शुरू होगा। उन्होंने बताया कि 341 गांवों की सूची में 11 गांव हरिद्वार के भी शामिल कर लिए गए हैं।
वर्ष 2013 में आपदा के बाद सर्वेक्षण करके डेढ़ साल पहले रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेज दी है। उन गांवों की सूची दी गई थी जहां भूस्खलन का अधिक खतरा है। इन्हें कहीं और शिफ्ट किया जा सकता है। हमने रिपोर्ट भेज दी है, उसके बाद शासन को निर्णय लेना है।
- डॉ. वीके शर्मा, उप महानिदेशक, जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया