एनडी तिवारी सरकार ने किया था आदेश
राज्य सरकार की नौकरियों में उत्तराखंड की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के लिए कांग्रेस की नारायण दत्त तिवारी सरकार ने 24 जुलाई 2006 को आदेश जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर हाईकोर्ट ने आदेश पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ताओं के वकील की ओर से कहा गया था राज्य सरकार के पास राज्य के निवास स्थान पर आधारित आरक्षण प्रदान करने की शक्ति नहीं है। भारत का संविधान केवल संसद को अधिवास के आधार पर आरक्षण देने की अनुमति देता है। राज्य सरकार का वर्ष 2006 का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 का उल्लंघन है।
11 विधेयकों को मिली मंजूरी, तीन शेष
राजभवन को 14 विधेयक मंजूरी के लिए भेजे गए। इनमें से 11 को मंजूरी मिल गई है। जबकि महिला आरक्षण विधेयक, भारतीय स्टांप उत्तराखंड संशोधन विधेयक और हरिद्वार विश्वविद्यालय विधेयक को राजभवन से अभी मंजूरी नहीं मिली है।
कूड़ा फेंका या थूका तो नहीं होगी जेल
प्रदेश में अब सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकने या थूकने पर जेल नहीं होगी। उत्तराखंड कूड़ा फेंकना एवं थूकना प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक 2022 को राजभवन की मंजूरी मिल गई है।
प्रदेश में अधिनियम में यह व्यवस्था थी कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर कूड़ा फेंकता है या थूकता है तो उसे छह महीने का कारावास और 500 रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है। अब इस अधिनियम में बदलाव करते हुए इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। कूड़ा फेंकने या थूकने पर अब 500 के बजाय दो हजार रुपये जुर्माना लगेगा। यदि कोई व्यक्ति एक बार जुर्माना लगाने के बाद भी फिर से ऐसा करता है तो उसे हर बार दो हजार रुपये जुर्माना देना होगा।
विधेयक का परीक्षण किया जा रहा है। राजभवन की ओर से इस पर कानूनी राय ली जा रही है।
- डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव, राजभवन।