पर्वतीय राज्यों को ध्यान में रखते हुए नीतियां और योजनाएं बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार अब एडवोकेसी ग्रुप का गठन करेगी।
यह ग्रुप केंद्र पर दबाव बनाने का काम करेगा। इसके लिए प्रदेश सरकार पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट सहित अपने-अपने क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले लोगों को एक मंच पर लाने की कवायद में जुटी है।
मुख्यमंत्री के सलाहकार और प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. इंदु कुमार पांडे ने इसकी पुष्टि की। केंद्र से उपेक्षा की शिकायत राज्य पहले से ही करता आ रहा है। केंद्र में भाजपा और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के कारण इस शिकायत को राजनीतिक रूप भी मिल चुका है।
इस राजनीतिक नूरा कुश्ती से इतर पहले से ही यह माना जाता रहा है कि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग से विकास का मॉडल होना चाहिए। पूर्व में योजना आयोग की बीके चतुर्वेदी कमेटी ने केंद्र सरकार का ध्यान इस और खींचा भी था।
कमेटी के सदस्य रहे प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. आरएस टोलिया के मुताबिक कमेटी ने हिमालयी राज्यों के लिए ग्रीन बोनस देने की संस्तुति की थी और विकास में पिछड़ेपन को आधार बनाते हुए संकेतक (इंडेक्स) भी तैयार किया था। फिलहाल यह मामला केंद्र के स्तर पर लंबित है।
अब प्रदेश सरकार इन मामलों की केंद्र में पैरवी के लिए राज्य में अलग से समूह गठित करने जा रही है। इसको एडवोकेसी ग्रुप नाम दिया जा रहा है। यह समूह राज्य की विशेष जरूरतों के हिसाब से केंद्र के सामने राज्य का पक्ष रखेगा और उसकी पैरवी करेगा।