केंद्र सरकार के सुगम भारत अभियान की कसौटी के पहले चरण में ही उत्तराखंड सरकार के एक चौथाई भवन फेल हो गए हैं।
केंद्र सरकार प्रदेश के सरकारी भवनों का बिल्डिंग आडिट करा रही है। आडिट में निशक्तजन अधिनियम के मानकों का पालन देखा जा रहा है। पहले चरण की आडिट रिपोर्ट में सचिवालय, कलक्ट्रेट, एयरपोर्ट सरीखे अहम भवनों को खारिज कर दिया गया है। केंद्र ने तत्काल कमियों को दूर करने के आदेश दिए हैं। मानकों के लिहाज से भवनों को सुधारने के लिए केंद्र विभागों को पैसा देगा।
सुगम भारत अभियान को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र राज्यों के सरकारी भवनों का निशक्तजन अधिनियम के मानकों के आधार पर बिल्डिंग आडिट करा रहा है। आडिट की जिम्मेदारी संस्था स्वयं को दी गई है।
संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम के साथ समन्वय बैठाकर संस्था यह कार्य कर रही है। अभियान का लक्ष्य यह है कि सरकारी भवनों में निशक्तजनों की पहुंच सुगम हो। अभियान के तहत संस्था स्वयं को राज्य के 100 सरकारी भवनों के आडिट के लिए सूची दी गई है।
अधिनियम के मानकों को तत्काल पूरा किया जाए
फाइल
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संस्था ने पहले चरण में राज्य के सचिवालय, बस अड्डे, एयरपोर्ट, तहसील, नगर निगम, डीएफओ कार्यालय, जिला जेल, राजाजी नेशनल पार्क टाइगर रिजर्व, पुलिस मुख्यालय समेत 25 भवनों का आडिट किया। ये सभी भवन सुगम भारत अभियान के मानकों पर फेल हो गए हैं।
आडिट करने के बाद संस्था ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी। इस पर केंद्र ने आदेश दिया है कि इन भवनों में अधिनियम के मानकों को तत्काल पूरा किया जाए। आयुक्त निशक्तजन कार्यालय से संबंधित विभाग को पत्र जारी कर दिए गए हैं। विभागों से कहा गया है कि भवनों का निर्माण सुधारने के लिए फौरन विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनवाएं।
आडिट में बताई गईं कुछ खामियां
किस अफसर का चैंबर कहां है? कोई संकेतक नहीं
कहीं भी ब्रेल भाषा में तख्ती नहीं है
वॉश रूम की किस साइड होगा, यह तय नहीं
सीढ़ियां कहां हैं, कोई संकेतक नहीं
सीढ़ियां बनाने में मानकों का पालन नहीं
वॉश रूम के दरवाजे बनाने में मानकों का पालन नहीं
लाउड स्पीकर पर आगंतुक को जानकारी की व्यवस्था नहीं
लिफ्ट में छूकर नंबर पता करने की व्यवस्था नहीं