बदरीनाथ के एक होटल में वेटर का काम करने के साथ-साथ दूध बेचने वाले मनीष रावत ने मेहनत के बल पर अपनी मंजिल रियो ओलंपिक तो हासिल कर ली। उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत मनीष रियो ओलंपिक में 20 किमी. वॉक रेस में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
शुक्रवार को रियो पहुंचे मनीष ने बताया कि ओलंपिक की तैयारी आसान नहीं थी। राजकीय इंटर कॉलेज बैरागना में पड़ता था जो घर से सात किमी. दूर था। इस तरह से 14 किमी. एक दिन में चलना पड़ता था। इस दौरान कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
2002 में पिता की मौत के बाद घर में सबसे बड़ा होने के कारण पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे ऊपर थी। इसके लिए खेतीबाड़ी के साथ-साथ हर वह काम करता था, जिससे कुछ पैसे मिल जाएं। 2006 में बदरीनाथ के एक होटल में वेटर का काम किया। दूध बेचता था। यात्रियों के साथ गाइड बनकर रुद्रनाथ जाता था।
खेल कोटे में मिली उत्तराखंड पुलिस में नौकरी
पुलिस
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बहुत ही मुश्किलों में दिन बीते, लेकिन खेल को नहीं छोड़ा। इसी दौरान मेरी मुलाकात अनूप बिष्ठ सर से हुई, जो गोपेश्वर स्टेडियम में कोच थे। उनके कहने पर आगे की पढ़ाई के लिए गोपेश्वर में ही एडमिशन ले लिया।
मनीष बताते हैं कि उन्होंने मुझे वॉक रेस में जाने को कहा, यहीं से मेरे कॅरियर की शुरुआत हुई। अनूप सर ने मुझे प्रशिक्षण से लेकर आर्थिक भी मदद की।
2011 में मुझे उत्तराखंड पुलिस में खेल कोटे में जॉब मिल गई। जबकि अनूप सर का ट्रांसफर पिथौरागढ़ हो गया था। मैं भी उनके साथ पिथौरागढ़ आ गया।
भारत के लिए ओलंपिक मेडल लाने की तमन्ना
रियो ओलंपिक 2016
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2012 ऑल इंडिया पुलिस चैंपियनशिप में मुझे कांस्य पदक मिला, मेरी टाइमिंग 1 घंटा 25 मिनट थी। जबकि 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी की टाइमिंग 1 घंटा 22 मिनट थी।
यह देखकर अनूप सर ने कहा कि मनीष तुम्हारी मंजिल अगला ओलंपिक है। इसकी तैयारी के लिए तुम्हे पटियाला जाना होगा। इसके बाद मैं पटियाला आ गया और अनूप सर तब भी मेरी मदद करते रहे। आज मैं अपनी मंजिल के करीब हूं, बस अब एक पदक की उम्मीद है।
मेरी तैयारियां बेहतर चल रही हैं। मेरा पूरा प्रयास है कि मैं भारत के लिए वॉक रेस में मेडल लाऊं। उत्तराखंड पुलिस से मुझे हर तरह का सहयोग मिल रहा है।
-मनीष रावत
बेस्ट परफॉर्मेंस
2016 में जापान में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में 1:20:26 टाइमिंग रही।