राज्यपाल अजीज कुरैशी का कहना है कि दिमागी रूप से दिवालिया कुछ लोग मुझ पर आरोप लगाते हैं कि मैं निजी स्वार्थ के लिए गौ-गंगा और संस्कृत पर बात कर भाजपा के एजेंडे पर काम कर रहा हूं।
मैं नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और भाजपा की सरकार से बहुत पहले से इन विषयों पर बोलता और काम कर रहा हूं। राज्यपाल ने बुधवार को राजभवन में अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन को लेकर बुलाई गई पत्रकार वार्ता के दौरान यह बात कही।
उन्होंने कहा कि मैं संस्कृत से बेहद प्रभावित हूं। देवभूमि में संस्कृत को दूसरी भाषा का दर्जा जरूर मिला है लेकिन मैं चाहकर भी संस्कृत में शपथ नहीं ले सका। मैंने इच्छा जताई तो मुश्किल से पांच गलतियों के साथ शपथपत्र आया। दोबारा भेजा गया तो भी तीन गलतियां थीं। मुझे किसी ने सलाह दी कि गलत शपथ ग्रहण नहीं लें।
कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और अधिकारियों से कहा भी कि संस्कृत का सही प्रारूप उपलब्ध नहीं करा सके। एक मुस्लिम के संस्कृत में शपथ लेने से इतिहास बनता। उन्होंने बताया कि मैं संस्कृत से एमए करना चाहता था लेकिन कठिनाई महसूस की।
कहा, संस्कृत के अच्छे दिन आएंगे
उनका कहना है कि अरबी के व्याकरण में संस्कृत का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। उन्होंने इंडोनेशिया में मुसलमानों के भी संस्कृत को संस्कृति के रूप में अपनाने की बात कही।
राज्यपाल ने कहा कि कहने को संस्कृत राज्य की दूसरी भाषा है लेकिन पिछले डेढ़ साल मैंने कई बात राज्य सरकार को लिखकर और विभिन्न मंचों से हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की जरूरतों पर ध्यान दिलाया। बावजूद सरकर वहां पर्याप्त स्टाफ और फेकेल्टी तक उपलब्ध नहीं करा सकी है।
मैं चाहता हूं कि यह विश्वविद्यालय दुनिया में पहचान बनाए। यहां विदेशी संस्कृत पर शोध करने आएं। उन्होंने कहा कि राज्य में संस्कृत के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया गया। संस्कृत एक वर्ग विशेष की भाषा बनकर रह गई है। इसे बड़े जनमानस की भाषा बनाने की आवश्यकता है। विश्वास जताया कि संस्कृत के अच्छे दिन जरूर आएंगे।
राजभवन में जुटेंगे तीन सौ विद्वान
राजभवन में 26 से 28 सितंबर के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के लिए करीब तीन सौ विद्वानों को चुना गया है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल ने बताया कि सम्मेलन में आठ देशों के 15 प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में दस बिंदुओं पर चर्चा होगी। राज्यपाल ने बांग्लादेश, भूटान, थाईलैंड आदि देशों के राजदूतों से संपर्क किया ताकि संस्कृत स्कॉलर यहां आएं।
उन्होंने बताया कि दुनिया के 104 देशों में अकादमिक स्तर पर संस्कृत पढ़ी-पढ़ाई जा रही है। संस्कृत विश्वविद्यालय ने अपने स्नातक पाठ्यक्रम में अंग्रेजी और कंप्यूटर को अनिवार्य किया है। बांग्लादेश जैसे मुस्लिम, जापान एवं थाईलैंड जैसे बौद्ध, कनाडा जैसे ईसाई और चीन जैसे वामपंथी देश में भी संस्कृत का पठन-पाठन हो रहा है।