फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए, कैसे केंद्र को मात देने में जुटी उत्तराखंड सरकार

Sat, 22 Aug 2015 02:38 PM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
स्टेट वॉर मेमोरियल के लिए सरकार जमीन चिह्नित कर पूर्व सैनिकों में यह राय बनाने में जुटी है कि केंद्र के चीड़ बाग से उनका चयनित स्थल बेहतर है। भाजपा से पटकनी खा चुकी प्रदेश सरकार को वन रैंक वन पेंशन आंदोलन से संजीवनी मिली है।
विज्ञापन


जब तक पूर्व सैनिकों का आंदोलन चलेगा रक्षा मंत्री मनोहर परिकर उत्तराखंड नहीं आएंगे। उनका दौरा अनिश्चित समय के लिए टलने से राज्य सरकार को ग्रेस पीरियड मिला है। वॉर मेमोरियल को प्रदेश सरकार ने केंद्र से प्रतिस्पर्धा के तौर पर लिया है।

सरकार ने खुद को पूर्व सैनिकों से किये वायदे पर खरा उतारने के लिए एकाएक पुरानी जेल परिसर को स्मारक के लिए हस्तांतरित करने के निर्देश दे दिए। रक्षा मंत्री का दौरा टलने से मिले समय में सरकार ने स्मारक का शिलान्यास कर बाजी पलटने की तैयारी शुरू कर दी है।
विज्ञापन
Trending Videos

पूर्व सैनिकों में आम राय बनाने में जुटी सरकार

सरकार की सैनिक कल्याण परिषद पूर्व सैनिकों में यह राय बनाने में जुट गई है कि चीड़ बाग स्टेट वॉर मेमोरियल के लिए उपयुक्त नहीं है। परिषद ने शुक्रवार को पूर्व सैनिकों की बैठक बुलाकर उन्हें समझाने का प्रयास किया कि चीड़ बाग में जिस जगह का चयन किया गया है वह नाकाफी है।

कैंट सैन्य क्षेत्र में होने से आम आदमी खुले मन व आसानी से नहीं जा सकता है। परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलबीर सिंह रावत के अनुसार राज्य सरकार का चयनित स्थल शहर के बीचों बीच है, जिसपर शीघ्र निर्माण शुरू होगा। लिहाजा चीड़ बाग के चयनित स्थल को सेना के उपयोग के लिए ही सुरक्षित रखा जाए।
विज्ञापन

फौजियों को पसंद नहीं शहीदों पर राजनीति

शहीदों के नाम पर राज्य में वॉर मेमोरियल पर केंद्र और प्रदेश सरकार की अलग सोच फौजियों को पसंद नहीं आ रही है। एक्स सर्विसेस लीग देहरादून के संरक्षक ब्रिगेडियर केजी बहल (रि) ने दो स्टेट वॉर मेमोरियल होने को अनुचित माना है।

शहीद सैनिकों के लिए चीड़ बाग और पुरानी जेल में अलग-अलग वार मेमोरियल की कोशिशें शर्मनाक लग रही हैं। कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा कांग्रेस में बंटवारा नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री हरीश रावत से आग्रह किया है कि वह पहल कर केंद्र, भाजपा और पूर्व सैनिकों से मिलकर इस मसले को सुलझाएं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें