फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस बेटी के ज़ज्बे को है सलाम, उत्तराखंड को मिली पहली महिला ड्राइवर

Mon, 27 Nov 2017 07:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रेनू सकलानी
विज्ञापन
1 of 9
Mamta pujari
रुद्रप्रयाग (गुप्तकाशी) की इस बेटी के जज्बे को सलाम है। गाड़ी चलाने के शौक को इस बेटी ने अपना पेशा बनाया, जिसके चलते उत्तराखंड को पहली कॉमर्शियल महिला ड्राइवर मिल गई है।
विज्ञापन

2 of 9
Mamta pujari
परिस्थि‌तियां कभी भी बदल सकती है, इसलिए कोई भी काम सीखने में कोई हर्ज नहीं। रुद्रप्रयाग की 33 वर्षीय ममता पुजारी उत्तराखंड की पहली कॉमर्शियल महिला ड्राइवर होगी। उन्हें यह अवसर सहेली ट्रस्ट की ओर से मिला है। ट्रस्ट की ओर से शहर में जल्द ही महिला कैब शुरू करने का प्रयास भी किया जा रहा है।
विज्ञापन

3 of 9
Mamta pujari
ममता फिलहाल ट्रस्ट में काम कर रही लड़कियों को लाने और ले जाने का काम कर रही है। वह संस्था की ही वैन चलाती है। ममता ने भी अपनी इच्छा जताई है कि सरकार इसे अपने स्तर भी करें तो पूरे राज्य में लड़कियों की सुरक्षा को और बेहतर किया जा सकेगा। राज्य में लड़कियों के लिए भी अन्य राज्यों की तरह कैब शुरू की जाए, जिसमें महिला चालक ही हो।

4 of 9
Mamta pujari
ममता पुजारी का कहना है कि महिलाओं और लड़कियों को कैब सुरक्षा मिलने के साथ , महिला चालक के फील्ड में आने का मौका मिलेगा। कहना है कि काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता। बतौर ममता मुझे कॉमर्शियल महिला ड्राइवर बनने में बेहद खुशी हो रही है।
विज्ञापन

5 of 9
Mamta pujari
अन्य शहरों में महिला ड्राइवर कई देखने को मिलेंगी, लेकिन उत्तराखंड में पहली बार सहेली ट्रस्ट की ओर से यह पहल की गई।
विज्ञापन

6 of 9
Mamta pujari
ममता बताती है कि उन्हें शुरू से गाड़िया चलाने का बेहत शौक रहा। नौकरी के अभाव में उनके लिए जीवन चलाना मुश्किल हो रहा। ऐसे में जब उन्हें ड्राइवर की नौकरी का पता चला तो उन्हें झट से आवेदन भी कर दिया। वहीं ट्रस्ट की ओर से एक अभिनव पहल के रूप में लेते आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन

7 of 9
Mamta pujari
ममता की दो बड़ी बहनें है, जिनकी शादी हो चुकी है। ममता ही अब अपने मां बाप का सहारा है। ममता कहती है कि जब मैंने यह बात पिता को बताई तो उन्होंने कहा कि यह भी लड़कियों के लिए एक फील्ड है। इसलिए काम काम है।

8 of 9
Mamta pujari
सहेली संस्था के ट्रस्टी  नितिन पांडे ने बताया कि संस्था की ओर से यह पहल इसलिए की गई ताकि राज्य में लड़कियों की सुरक्षा को और बेहतर किया जा सके।  कहा कि ममता ने महिलाओं के लिए मिसाल पेश की है। पांडे के मुताबिक पहली बार राज्य में महिला ने कॉमर्शियल वैन चलाना शुरू किया है।
विज्ञापन

9 of 9
Mamta pujari
नितिन पांडे का कहना है कि कम पढ़े लिखे होने के कारण महिलाएं स्वयं को कमजोर समझती है। उन्हें नौकरी के अ‍वसर नहीं मिल पाते। ऐसे में उनका कोई न कोई हुनर उन्हें आगे लाता है। जिस तरह से ममता का हुनर उसे आगे लाया। गाड़ी चलाने में मास्टर ममता आज उत्तराखंड की पहली कॉमर्शियल महिला ड्राइवर बन गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें