हर की पैड़ी पर मां गंगा अपने पूर्ण स्वरूप में प्रवाहमान हैं। सरकारें बदलती रहती हैं। यदि आज की सरकार उस वक्त की मेरी सरकार के फैसले (हर की पैड़ी पर जल प्रवाह को गंगा की जगह गंगनगर नाम देना) को बदलती है तो उन्हें खुशी होगी।
यदि त्रिवेंद्र सरकार कोई फैसला नहीं लेती तो कांग्रेस 2022 में सत्ता में आने पर अपने पुराने आदेश को बदलेगी। गंगा परिषद, अखाड़ा परिषद समेत अन्य साधु-संतों इसके खिलाफ काफी समय से मुखर हैं।
हरीश रावत का कहना है कि सरकार इस शासनादेश को इस समय की स्थिति को देखते हुए रद्द कर सकती है। कैबिनेट के जरिये यह फैसला किया जा सकता है।