बाढ़ की वजह से प्रदेश में लैंड स्लाइड के हाई डेंजर जोन बढ़ गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस पैमाने पर बाढ़ आई है, उससे लो हैजर्ड जोन (कम खतरे वाला क्षेत्र), हाई हैजर्ड जोन (अधिक खतरे वाला क्षेत्र) में तब्दील हो गए हैं।
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नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की ओर से अपडेट की जा रही लैंड स्लाइड इनवेंटरी में 268 और लैंड स्लाइड जुड़े हैं। नए चिन्हित लैंड स्लाइड के साथ इनकी संख्या 1604 जा पहुंची है।
वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के लैंड स्लाइड विशेषज्ञ डा. विक्रम गुप्ता के अनुसार उत्तराखंड में नए सिरे से लैंड स्लाइड जोनेशन मैपिंग की जरूरत है। सरकार भी ऐसा विचार कर रही है ताकि लैंड स्लाइड संभावित क्षेत्रों को पहले से चिन्हित कर उनके लिए अलग से कार्ययोजना तैयार की जा सके।
पहले मिट्टी की जांच कराई जाए
यह मैपिंग बड़े स्तर की जाए ताकि विकासात्मक गतिविधियों के लिए उसका प्रयोग किया जा सके। डा. विक्रम गुप्ता के मुताबिक लैंड स्लाइड संभावित क्षेत्रों में आपदा से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि किसी भी जगह निर्माण से पहले मिट्टी की जांच कराई जाए। साथ ही ऐसी साइट चुनी जाए जो सुरक्षित हो।