दैवी आपदा के बाद केंद्र से चौदह हजार करोड़ की मंजूरी तो मिल गई है। लेकिन इस पैसे के समय पर खर्च को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
बड़ा सवाल यह है कि राज्य के वार्षिक प्लान को खर्च करने में फेल साबित हो रहा सरकारी तंत्र इतनी बड़ी धनराशि को समय पर कैसे खर्च कर सकेगा। चालू वित्त वर्ष की वार्षिक योजना 8800 करोड़ की है। केंद्र की मदद समेत अब सरकारी सिस्टम को 22,800 करोड़ रुपये खर्च करना है।
पूरा पैसा खर्च नहीं हुआ
गुजरे चार सालों के आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि राज्य का सरकारी तंत्र वार्षिक प्लान का पूरा पैसा खर्च नहीं कर सका। तमाम बैठकों और मानीटरिंग के बावजूद दो तिहाई से ज्यादा बजट खर्च नहीं हो सका। यह राशि भी उस वक्त खर्च हो सकी, जबकि सरकारी तंत्र को दंड का भय दिखाया गया। अब केंद्र सरकार की मदद के बाद राज्य सरकार के पास राज्य योजना समेत 22,800 करोड़ का खर्च अवस्थापना सुविधाओं पर करने की बड़ी जिम्मेदारी है।
अब बात सरकारी तंत्र की। राज्य के पास अवस्थापना का काम करने केलिए तमाम वही पुराने संसाधन और जनशक्ति हैं। उन्हीं अफसरों पर समयबद्ध तरीके से पैसा खर्च करने का जिम्मा है, जो राज्य योजना का पैसा भी समय पर करने में विफल साबित होते रहे हैं।
इसके बाद भी अगर सरकार दावा कर रही है कि पैसे का समय से और सही उपयोग कर लिया जाएगा तो जाहिर है कि इसके लिए किसी न किसी मैकेनिज्म की तलाश तो करनी ही होगी। अगर केंद्रीय मदद का समय पर उपयोग नहीं हो सका तो आपदा से प्रभावित लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की बात करना ही बेमानी होगा।
ये है खर्च की स्थिति
वर्ष----------कुल बजट--------खर्च
2009-10 - 5200 - 3850
2010-11 - 6800 - 4474
2011-12 - 7800 - 5129
2012-13 - 8200 - 6100 (सभी राशि करोड़ रुपये में)
फेसबुक पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें