आपदा को छह माह बीतने के बाद भी प्रभावितों को कोई मदद नहीं मिल पा रही है। उत्तरकाशी में आई बाढ़ में अपने अशियाने गंवा चुके भटवाड़ी प्रखंड के सबसे दूरस्थ पिलंग गांव के 31 परिवारों को अभी तक अहेतुक सहायता तक नहीं मिल पाई है। संस्थाओं से मिले तिरपाल के नीचे सर्द रातें ग्रामीणों को काटनी पड़ रही है। ग्रामीण मुआवजे के लिए प्रशासन के चक्कर काट कर थक चुके हैं, लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवाय और कुछ नहीं मिल पाया।
31 घर बाढ़ मे बह गए थे
जून माह की बाढ़ में सड़क से 18 किलोमीटर दूर पिलंग गांव में 31 परिवारों के शीतकालीन आवास बाढ़ में बह गए थे। 20 जून को पटवारी ने गांव पहुंचकर नुकसान जायजा लिया और रिपोर्ट प्रशासन को भेजी थी, लेकिन अभी तक उन्हें मुआवजा तो दूर अहेतुक सहायता तक नहीं मिल पाई।
डीएम से की थी मुलाकात
डेढ़ माह पूर्व ग्रामीणों ने पूर्व विधायक गोपाल रावत के नेतृत्व में तत्कालीन डीएम डा. पंकज पांडेय से भी मुलाकात की। डीएम ने गांव आकर स्थिति का जायजा लेने के बाद कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन न तो डीएम गांव गए और न मुआवजा मिला। ऐसे में ग्रामीणों को तिरपाल के नीचे सर्द रातें काटनी पड़ रही हैं।
विधायक ने कानूनगो को दिए थे निर्देश
सात जुलाई 2013 को ग्रामीण क्षेत्रीय विधायक विजयपाल सजवाण से मिले। विधायक ने ग्रामीणों के आवासीय भवनों को पूर्ण क्षति में मानकर कानूनगो को रिपोर्ट देने के लिए लिखा था, लेकिन अभी तक परिणाम सिफर हैं।
मुआवजे के लिए 18 किलोमीटर पैदल चलकर ग्रामीण कई बार तहसील एवं जिला मुख्यालय के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। अभी तक हमें अहेतुक सहायता तथा टेंट तक उपलब्ध नहीं कराए गए। - बचन सिंह राणा, पूर्व प्रधान पिलंग गांव
इस साल के सभी प्रभावितों को मुआवजा दे दिया गया है। यदि पिलंग गांव के प्रभावितों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला तो इसकी जांच करवाई जाएगी।-केके सिंह, एसडीएम भटवाड़ी