दून अस्पताल समेत शहर के 40 अस्पतालों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वे जैविक कचरे का निस्तारण कहां कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अभी तक इन अस्पतालों ने अधिकार पत्र नहीं लिया है।
बोर्ड के सदस्य-सचिव विनोद सिंघल ने बताया कि अधिकार-पत्र जारी न करने वाले अस्पतालों को नोटिस जारी की जा रही है।
नहीं लिया अधिकार पत्र
अस्पतालों को हर साल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अधिकार पत्र लेना पड़ता है। लेकिन अभी तक सरकारी और गैर-सरकारी 40 अस्पतालों ने अधिकार पत्र नहीं लिया है। साल खत्म होने को है और कई अस्पतालों ने अभी तक अधिकार पत्र के लिए बोर्ड में आवेदन भी नहीं दिया।
शहर में कई अस्पताल बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए बिना ही अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं। बोर्ड ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार कर रहा है।
ऐसे बनता है अधिकार पत्र
बोर्ड के सदस्य-सचिव सिंघल ने बताया कि अस्पताल अधिकार पत्र के लिए आवेदन करते वक्त यह बताते हैं कि अस्पतालों से निकलने वाले जैविक कचरे का निस्तारण कैसे किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जैविक कचरे को आम कचरे का साथ नहीं फेंका जा सकता है। इससे बीमारियां फैल सकती हैं।