शिक्षा विभाग में पहले शिक्षकों के चार मैदानी जनपदों में अनिवार्य तबादले किए गए, फिर विभाग को न करने के आदेश की याद आई। विभाग ने इसके बाद इन तबादलों को निरस्त करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति को प्रस्ताव भेजा।
प्रदेश में वर्तमान शिक्षा सत्र में शिक्षकों के दुर्गम से सुगम और सुगम से दुर्गम में अनिवार्य तबादले लिए गए। दुर्गम से सुगम में जिन शिक्षकों के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल के मैदानी क्षेत्रों के स्कूलों में तबादले किए गए, उन्होंने कार्यभार ग्रहण कर लिया। वहीं सुगम में पसंद की जगह पर तबादला न होने पर 314 शिक्षकों ने दुर्गम में ही तैनाती बनाए रखने का अनुरोध किया।
इस बीच विभाग को हाईकोर्ट के उस आदेश की याद आई, जिसमें कहा गया है कि दुर्गम क्षेत्र के 70 प्रतिशत पदों को न भरने तक चार मैदानी जनपदों में शिक्षकों के अनिवार्य तबादले न किए जाएं। विभाग ने इसके बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति को प्रकरण प्रस्तुत करते हुए दुर्गम से सुगम में अनिवार्य तबादले निरस्त करने का प्रस्ताव भेजा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने भी पूर्व तैनाती स्थल (दुर्गम) में रहने के इच्छुक शिक्षकों को दुर्गम में बने रहने की इस शर्त के साथ अनुमति दे दी कि अगले पांच वर्षों तक उन शिक्षकों के तबादलों पर विचार नहीं किया जाएगा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने शिक्षकों के तबादले किए हैं, तबादलों को लेकर हाईकोर्ट का जो भी आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा।
-अरविंद पांडे, शिक्षा मंत्री