प्रदेश में फीस एक्ट का मामला पिछले कई सालों से चला आ रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की हरीश रावत सरकार में तत्कालीन शिक्षा सचिव एमसी जोशी ने इसका ड्राफ्ट तैयार किया गया था। इससे पहले की इसे कैबिनेट में लाया जाता सरकार इस मामले में बैकफुट पर आ गई थी। पूर्व में त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए भी कुछ ऐसा ही हुआ और एक्ट का प्रस्ताव कैबिनेट में आते-आते रह गया। अब प्रदेश को नए मुख्यमंत्री मिलने के बाद शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने एक्ट के प्रस्ताव को कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए हैं।
यदि स्कूल खुद फीस तय करेंगे तो इस एक्ट से अभिभावकों को राहत नहीं मिल पाएगी। सरकार को प्रदेश के निजी स्कूलों का वर्गीकरण करना चाहिए। जिनमें सुविधाओं के हिसाब से उनकी फीस तय की जानी चाहिए।
-संतोष कुमार शील, पूर्व अपर निदेशक शिक्षा विभाग
फीस एक्ट का प्रस्ताव न्याय और वित्त सहित कई विभागों के पास जाएगा। उन विभागों की सहमति के बाद ही इसे कैबिनेट में लाया जाएगा।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, शिक्षा सचिव
फीस एक्ट को लेकर विभाग को कुछ सुझाव दिए हैं। विभागीय अधिकारियों को कहा गया है कि इसे प्रस्ताव में शामिल कर इसे कैबिनेट में लाने के लिए निदेशालय और शासन के अधिकारी समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करें।
-अरविंद पांडे, शिक्षा मंत्री