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'कंगाल' हुआ उत्तराखंड, अब टेंशन में शासन

Sun, 26 Feb 2017 12:20 PM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड की सत्ता पर किस दल की सरकार काबिज होगी, बेशक यह अभी रहस्य हो, मगर नई सरकार के सामने आर्थिक संकट एक बड़ी चुनौती होगी, यह सच एकदम साफ है।
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मौजूदा वित्तीय वर्ष में अकेले स्टांप और रजिस्ट्री से होने वाली कमाई में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। निर्धारित लक्ष्य से ये आंकड़ा और भी कम है। कमाई में आई इस गिरावट के लिए शासन नोटबंदी को जिम्मेदार मान रहा है। शराब के ठेके हाइवे से हटाने के कोर्ट के आदेश के बाद अब आबकारी से होने वाली आय को लेकर भी सरकार के वित्तीय प्रबंधकों की पेशानी पर बल हैं।

खराब माली हालत में अब उन्हें दो ही रास्ते नजर आ रहे हैं कि या तो कमाई बढ़ाई जाए या किफायत बरती जाए।
करीब 40 हजार करोड़ के कर्ज से जूझ रहे प्रदेश को नोटबंदी से बड़ा झटका लगा है। अकेले स्टांप और रजिस्ट्री शुल्क से ही सरकार को इस वित्तीय वर्ष में 1200 करोड़ रुपये की आय का अनुमान था।
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मगर फरवरी माह में वह 554 करोड़ रुपये पर ही पहुंच सकी है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में इस महीने 683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हो चुका था। पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बार की कमाई 10 फीसदी कम है और निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो रजिस्ट्री शुल्क में भारी गिरावट आई है। कुछ ऐसा ही असर बिक्री कर, मनोरंजन कर व अन्य मदों से होने वाली आय पर भी हुआ है।
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कैसे पूरे होंगे चुनावी वादे

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विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने प्रदेश की जनता से कई चुनावी वादे किए हैं। कांग्रेस के वादों को पूरा करने को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत से सवाल पूछे गए थे।

दरअसल, उन्होंने सत्ता में आने के 100 दिन में बेरोजगारी भत्ता देने और नई नौकरियां खोलने का वादा किया है। इन दो अहम घोषणाओं को पूरा करने के लिए करीब 200 करोड़ रुपये चाहिए। पात्रों की संख्या बढ़ी तो खर्च और ज्यादा बढ़ेगा। यही वजह है कि सीएम ने पिछले दिनों सचिवालय पहुंचकर सचिव वित्त को आय के नए संसाधन जुटाने के निर्देश दिए।
 
किफायत बरतो या आमदनी बढ़ाओ
आर्थिक जानकारों की मानें तो सरकार चलाने के लिए अब दो ही विकल्प हैं। या तो किफायत बरती जाए या सरकार आमदनी बढ़ाए। किफायत बरतने के लिए उसे गैर योजना आकार घटाना होगा। वर्तमान में कुल बजट का 83 फीसदी इसी मद में खर्च हो रहा है। गैर योजना आकार घटाने के लिए नई नौकरियों पर रोक लगानी होंगी। लेकिन चुनाव में दोनों प्रमुख पार्टियों ने रोजगार का वादा किया है।

खनन, आबकारी और वैट, स्टांप व रजिस्ट्री शुल्क आमदनी के बड़े जरिए हैं। खनन पर पर्यावरण संरक्षण का पहरा है। वैट, स्टांप व रजिस्ट्री की आमदनी पर नोटबंदी की मार पड़ी है और अब कोर्ट के आदेश पर हाईवे से शराब ठेके हटाने के बाद आबकारी की कमाई पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

विमुद्रीकरण के बाद से राज्य की आय पर प्रतिकूल असर पड़ा है। स्टांप और रजिस्ट्री शुल्क पिछले वित्तीय वर्ष से भी 10 फीसदी कम है। इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य पूरा हो पाना मुश्किल है। आय के नए संसाधनों की तलाश जारी है। विभागीय स्तर पर बैठकें हो रही हैं, जिनमें आय की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। 
- अमित सिंह नेगी, सचिव वित्त
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